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लोरेटो कॉन्वेंट स्कूल, तारा हॉल, शिमला में 31 अक्तूबर को कौशल मेला 2026 तथा कला एवं शिल्प प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। विद्यालय की सचिव सिस्टर सबरीना, प्रधानाचार्या श्रीमती ऋतु शर्मा तथा मुख्याध्यापिका श्रीमती मोनिका शर्मा के कुशल मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन से आयोजित इन कार्यक्रमों में शिक्षकों के सहयोग और छात्राओं की मेहनत, लगन एवं सृजनात्मकता की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही।

कौशल मेले का उद्घाटन विद्यालय की आठ प्रतिभाशाली छात्राओं ने किया। कनिष्ठ वर्ग से पल्किन, पलाक्षा, एमरिन और अनहा तथा वरिष्ठ वर्ग से संस्कृति, रिया प्रकाश, मनमहकश और भव्या शर्मा ने उद्घाटन कर समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की।

कौशल मेले में विभिन्न विभागों ने अपनी अभिनव एवं ज्ञानवर्धक प्रस्तुतियों से दर्शकों को आकर्षित किया। अंग्रेज़ी विभाग ने कक्षा नौवीं रोज़ द्वारा परिकल्पित ‘लोरेटो बुलेटिन’ के माध्यम से पत्रकारिता और समाचार प्रस्तुति की झलक दिखाई, जबकि हिंदी विभाग ने ‘करियर व्हील’ के माध्यम से हिंदी भाषा से जुड़े साहित्यिक, रचनात्मक एवं रोजगार के अवसरों को प्रदर्शित किया। विज्ञान विभाग ने हाइड्रोपोनिक्स, पवन ऊर्जा, भूकंपलेखी, स्वचालित स्ट्रीट लाइट सेंसर और ‘जीवन रक्षक स्मार्ट हाउस’ जैसे मॉडल प्रस्तुत किए। सामाजिक विज्ञान विभाग ने सतत विकास, वर्षा जल संचयन, अपशिष्ट प्रबंधन और हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत को उजागर किया। गणित विभाग के रोबोटिक क्रेन, लोडर एवं फ्रैक्टल मॉडल विशेष आकर्षण रहे। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने बीएमआई कैलकुलेटर, अल्ट्रासोनिक सेंसर और स्मार्ट सुपरमार्केट वेबसाइट प्रस्तुत की। नृत्य विभाग ने आठ शास्त्रीय एवं पारंपरिक नृत्य शैलियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विविधता दर्शाई, जबकि संगीत विभाग की मधुर प्रस्तुतियों ने आयोजन में विशेष रंग भर दिया।

इसी अवसर पर आयोजित कला एवं शिल्प प्रदर्शनी में कक्षा तीसरी से दसवीं तक की छात्राओं ने अपनी कलात्मक प्रतिभा और हस्तकौशल का शानदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी में आकर्षक पेंटिंग्स, टाई एंड डाई तकनीक से तैयार रंग-बिरंगे दुपट्टे, बोतल कला, मैक्रम कला, दीवार सज्जा, पौधों के लिए हैंगिंग पॉट्स, हस्तनिर्मित आभूषण, मोतियों से बनी वस्तुएँ, कागज़ के फूल, शुभकामना-पत्र, सजावटी फ्रेम, पेन स्टैंड तथा अनेक कलात्मक वस्तुएँ प्रदर्शित की गईं। पुरानी एवं अनुपयोगी वस्तुओं को नया रूप देकर छात्राओं ने पुनः उपयोग और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

दोनों आयोजनों ने छात्राओं को कक्षा में अर्जित ज्ञान को व्यावहारिक रूप देने, नए प्रयोग करने तथा अपनी प्रतिभा और रुचियों को पहचानने का अवसर प्रदान किया। इन गतिविधियों के माध्यम से उनमें आत्मविश्वास, सामूहिक कार्य, तार्किक चिंतन, समस्या समाधान, कलात्मक अभिव्यक्ति और उद्यमशीलता जैसे कौशल विकसित करने पर विशेष बल दिया गया।

कौशल मेले और कला एवं शिल्प प्रदर्शनी ने विद्यालय की समग्र एवं अनुभवात्मक शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। यह आयोजन इस विश्वास का सशक्त उदाहरण रहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को रचनात्मक, आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बनाने की प्रक्रिया है।